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समझ

चेहरे पे बने दुख को देख
खुशी को तूने भुला दिया
हाथों पे बने जख्मों को देख
हृदय का सुकून तूने अवहेल दिया।

अंगारों पे चले कदमों को
तू जले कदम समझता था
ये कदम अंगारों पे चले हैं
ये तू न समझता था।

कुछ क्षण की तकलीफों को
तू पागलपन कहने लगा
पागलपन में खोने की
लत को तू समझने लगा।

ऐहसास, जैसे तेरी हर सांस
मानो कैसे थम गई
माथे की शिकन तेरी
हंसी में बदल गई।

सोच-सोच के चलते चलते
मंजिल तुझे पानी थी
बिन सोचे तुझे चलना है
ये बात तुझे समझनी थी।